विदेशी विद्वज्जन, जिन्होँने हिन्दी का मानवर्द्धन किया
आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय भारत से बाहर विदेशी मूल का एक वर्ग ऐसा था, जो ज्ञान-पिपासु था। उसे विधिवत् ज्ञात हो चुका था कि भारत की अध्यात्म, भूगोल, इतिहास, समाज, अर्थ, साहित्य, संस्कृति, कलादिक धरोहर अतीव समृद्ध हैँ, जिन्हेँ समझने के लिए ‘हिन्दी’ की समझ विकसित करनी होगी।...